बेमेतरा में छत्तीसगढ़ बाँस तीर्थ संकल्पना समारोह भव्यता के साथ सम्पन्न
भारत के सबसे ऊँचे 140 फीट बैम्बू टावर पर मुख्यमंत्री ने किया ध्वजारोहण, बेमेतरा बना राष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र
रायपुर, 14 नवंबर 2025. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम कठिया में आज एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ, जब “छत्तीसगढ़ बाँस तीर्थ संकल्पना समारोह” के तहत भारत का सबसे बड़ा और 140 फीट ऊँचा बैम्बू टावर समर्पित किया गया. यह भव्य आयोजन न केवल बेमेतरा, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बना. समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव तथा कैबिनेट मंत्री श्री दयालदास बघेल विशेष रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी.
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 140 फीट ऊँचे बैम्बू टावर पर तिरंगा फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह संरचना केवल बाँस से बनी इमारत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की परंपरा, स्थानीय कौशल, नवाचार और ग्रामीण संभावनाओं का सशक्त प्रतीक है. मुख्यमंत्री ने मंच से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बाँस का पौधा रोपण किया और राज्य में बाँस आधारित कृषि को बढ़ावा देने की अपील की.
कार्यक्रम स्थल पर स्थापित विभिन्न बाँस उत्पाद निर्माण इकाइयों, प्रोसेसिंग केंद्रों और फैक्ट्रियों का मुख्यमंत्री ने बारीकी से अवलोकन किया. उन्होंने कारीगरों, किसानों और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी आजीविका, उत्पादन क्षमता और बाजार से जुड़ी चुनौतियों के बारे में जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक नीतिगत और आर्थिक सहयोग प्रदान करती रहेगी.
अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, नवाचार और प्रगति के नए आयाम रच रहा है. विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाले इस बैम्बू टावर के माध्यम से राज्य ने यह संदेश दिया है कि पारंपरिक संसाधनों का उपयोग कर भी आधुनिक और भव्य संरचनाएँ तैयार की जा सकती हैं. उन्होंने बताया कि बाँस आधारित उद्योग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प, एग्रो इंडस्ट्री और आधुनिक निर्माण तकनीक जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएँ हैं और सरकार किसानों, कारीगरों तथा युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की योजनाएँ लागू कर रही है.
उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते जलवायु और जलसंकट की स्थिति में बाँस की खेती एक कारगर विकल्प बनकर सामने आई है. उन्होंने बताया कि बाँस कम पानी में तेजी से बढ़ता है, मिट्टी कटाव को रोकता है और हरियाली बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बेमेतरा सहित कई क्षेत्रों में वर्षा की अनिश्चित परिस्थितियों के कारण जल की कमी महसूस की गई है, ऐसे में परंपरागत फसलों के साथ बाँस को जोड़कर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं.
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बाँस आधारित उद्योगों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयाँ, उत्पाद निर्माण केंद्र और सूक्ष्म उद्यम विकसित होंगे, जो युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेंगे. उन्होंने किसानों और युवाओं से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर बाँस उद्योग से जुड़ें और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें.
कैबिनेट मंत्री श्री दयालदास बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि बाँस की खेती और उससे जुड़े उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. बेमेतरा जिले में लम्बे समय से जलसंकट एक बड़ी चुनौती रहा है, ऐसे में धान की जगह या उसके साथ-साथ बाँस की खेती को अपनाना किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है. यह फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है और जल संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उत्पन्न करती है.
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर बाँस की उन्नत किस्मों, पौधारोपण तकनीक और मार्केटिंग मॉडल के बारे में जानकारी प्राप्त करें. मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बाँस से बने स्थानीय उत्पाद न केवल राज्य के भीतर, बल्कि राष्ट्रीय बाजार में भी अपनी विशेष पहचान बनाएंगे.
कार्यक्रम में बेमेतरा विधायक श्री दीपेश साहू, कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक श्री रामकृष्ण साहू, रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक, जिलाध्यक्ष श्री अजय साहू, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री श्री पाशा पटेल, पूर्व विधायक श्री अवधेश चंदेल, श्री राजेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान, सरपंच, जनप्रतिनिधि, महिला समूह और ग्रामीण उपस्थित रहे. पूरे कार्यक्रम के दौरान cultural प्रस्तुतियाँ, स्थानीय कलाकारों के प्रदर्शन और प्रदर्शनी स्टॉलों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया.
छत्तीसगढ़ के इस नए बाँस तीर्थ ने बेमेतरा को एक नए पर्यटन और कृषि-उद्योग केंद्र के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस पहल के बाद क्षेत्र में निवेश, रोजगार और बुनियादी ढाँचे के विकास की रफ्तार और तेज होगी.
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