Uttar Pradesh News

Major Crackdown in Barabanki: Administration Seals 71 Illegal Hospitals & Labs

rana 15 Nov 2025 1 min read
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बाराबंकी में बड़ा अभियान: 71 अवैध अस्पताल और लैब सील, मरीजों की सुरक्षा पर प्रशासन सख्त

डीएम और सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई, बिना लाइसेंस इलाज करने वाले संस्थानों पर गिरी गाज

बाराबंकी (उत्तर प्रदेश), 14 नवंबर 2025। जनपद बाराबंकी में स्वास्थ्य सेवाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया है। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के निर्देश और मुख्य चिकित्सा अधिकारी अवधेश यादव की अगुवाई में की गई कार्रवाई के दौरान जिले में संचालित 71 अवैध अस्पताल, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई अप्रैल से नवंबर तक चरणबद्ध तरीके से जारी रही।

प्रशासन की टीमों ने शहर और कस्बों में चल रहे ऐसे निजी अस्पतालों व लैबों की जांच की जो बिना मान्यता, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के इलाज कर रहे थे। कई स्थानों पर बिना प्रशिक्षित टेक्नीशियन के टेस्ट किए जा रहे थे, तो कहीं एक्सपायर या संदिग्ध दवाओं का उपयोग होते पाया गया। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों और कानूनी प्रावधानों का घोर उल्लंघन सामने आने पर इन संस्थानों को तत्काल प्रभाव से बंद कर सीलिंग की कार्रवाई की गई।

किन अस्पतालों और लैबों पर हुई कार्रवाई?

जिन क्लीनिक, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों को सील किया गया, उनमें कई नामचीन स्थानीय संस्थान भी शामिल हैं। प्रमुख रूप से देवा, हैदरगढ़, दरियाबाद, त्रिवेदीगंज, जैदपुर और फतेहपुर बेलहरा क्षेत्र में संचालित निजी स्वास्थ्य इकाइयों पर कार्रवाई की गई।

  • अजय कुमार वर्मा क्लीनिक
  • नैना पॉलीक्लीनिक
  • तिरुपति हॉस्पिटल
  • सिटी नर्सिंग होम
  • मोनिस पैथोलॉजी
  • हिंद डायग्नोस्टिक सेंटर
  • जन्नत हॉस्पिटल
  • एकता हॉस्पिटल
  • आर.के. पॉलीक्लीनिक
  • एपेक्स डायग्नोस्टिक सेंटर
  • नेशनल हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर

जांच टीमों ने इन सभी स्थानों पर दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, डॉक्टरों और कर्मचारियों की योग्यता, दवाओं के स्टॉक और मशीनों की टेस्टिंग रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा की। पर्याप्त दस्तावेज न मिलने या नियमों के अनुरूप व्यवस्था न होने पर संबंधित संस्थान को अवैध मानते हुए सील कर दिया गया।

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: जिलाधिकारी

जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने स्पष्ट संदेश दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या धोखाधड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिना पंजीकरण और बिना विशेषज्ञता के इलाज करने वाले केंद्र मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं, ऐसे संस्थानों को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा। सीएमओ अवधेश यादव ने भी लोगों से अपील की कि इलाज के लिए हमेशा पंजीकृत और मान्यता प्राप्त अस्पतालों, क्लीनिक और लैब का ही चयन करें।

इस सख्त कार्रवाई के बाद जिले में अवैध रूप से अस्पताल और लैब चलाने वालों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं आम नागरिकों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इसे मरीजों के हित में उठाया गया सराहनीय कदम बताया और उम्मीद जताई कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

अभियान आगे भी जारी रहेगा

प्रशासन ने संकेत दिया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आगे भी समय-समय पर छापेमारी अभियान चलाकर निजी स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित जांच की जाएगी। नियमों के अनुरूप कार्य करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। जिला प्रशासन का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को सुरक्षित व भरोसेमंद उपचार उपलब्ध हो सकेगा।