मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की 33वीं बैठक संपन्न
प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने और शहरी पेयजल आपूर्ति सुदृढ़ बनाने पर हुई व्यापक चर्चा
रायपुर, 14 नवंबर 2025। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन, रायपुर में छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की 33वीं तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल की पहली बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाने, भूजल स्तर में सुधार लाने और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। इसी क्रम में विभिन्न क्षेत्रों के लिए 14 नई सिंचाई परियोजनाओं को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई।
किसानों की आय और कृषि उत्पादन बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बैठक में कहा कि किसानों की आय में वृद्धि और कृषि उत्पादन बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में सिंचाई नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिंचाई रकबा बढ़ने से न केवल खेती को स्थिरता मिलेगी, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में सरगुजा, बस्तर और मैदानी इलाकों सहित पूरे प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के संतुलित विस्तार पर विस्तृत विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी प्रस्तावित परियोजनाओं की रूपरेखा, लागत और अपेक्षित लाभों की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी भागों में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए इन योजनाओं को गति दी जाए।
14 नई सिंचाई और जल प्रबंधन परियोजनाओं को सैद्धांतिक सहमति
गौरतलब है कि स्वीकृत परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में लगभग 01 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बढ़ने का अनुमान है। जिन प्रमुख परियोजनाओं को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई, उनमें शामिल हैं:
- बस्तर जिले में देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना
- बस्तर जिले में मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना
- रायपुर जिले के विकासखण्ड आरंग में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना
- अहिरन से गाजरीनाला जल संवर्धन निर्माण (खारंग–अहिरन लिंक परियोजना)
- बिलासपुर जिले के कोटा विकासखण्ड अंतर्गत छपराटोला फीडर जलाशय परियोजना
- कुम्हारी जलाशय जल क्षमता वृद्धि योजना के तहत समोदा बैराज से कुम्हारी जलाशय तक पाइप लाइन बिछाने का कार्य
- दुर्ग जिले के विकासखण्ड धमधा के सहगांव उद्वहन सिंचाई योजना
- खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिले में लमती फीडर जलाशय एवं नहरों का निर्माण कार्य
- राजनांदगांव जिले में मोहारा एनीकट में पेयजल के लिए चौकी एनीकट से मोहारा एनीकट तक पाइप लाइन के माध्यम से जल प्रदाय योजना
- जशपुर जिले की मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबयुक्त उद्वहन सिंचाई योजना
- जांजगीर–चांपा जिले में हसदेव बांगो परियोजना के वृहद ऑगमेंटेशन के अंतर्गत परसाही दाबयुक्त उद्वहन सिंचाई परियोजना
- कोरबा जिले में मड़वारानी बैराज निर्माण सह उद्वहन सिंचाई योजना
- गरियाबंद जिले की पैरी परियोजना के अंतर्गत सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक नहर (पाइप लाइन) योजना
- बिलासपुर जिले के खारंग जलाशय योजना की बाएं तट नहर के विस्तार के लिए पाराघाट व्यपवर्तन योजना से उद्वहन फीडर सिंचाई निर्माण कार्य
भूजल संरक्षण और पेयजल आपूर्ति सुदृढ़ करने पर विशेष फोकस
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भूजल संरक्षण, जल पुनर्भरण और जलाशयों के सुदृढ़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शहरी और अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाइप लाइन, बैराज और जलाशय आधारित योजनाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
बैठक में वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता श्री इंद्रजीत उइके सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि इन नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन से न केवल खेती को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल सुरक्षा और समग्र आर्थिक विकास को नया आधार मिलेगा।