लाभ पंचमी 2025: मुहूर्त, पूजा विधि और शुभ योग
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष लाभ पंचमी कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जा रही है। यह दिन आर्थिक समृद्धि, लाभ और शुभ अवसरों का प्रतीक माना जाता है।
विशेष मुहूर्त में सुबह जल्दी उठकर घर तथा कार्यस्थल की सफाई की जाती है और फिर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। पुरानी पुस्तकों, खातों, व्यापार-लेजर की पूजा की भी परंपरा है।
पूजा विधि में चंदन, अक्षत, दीप, फूल और मिठाई का सामंजस्य होता है। भगवान गणेश एवं देवी लक्ष्मी को मुख्य रूप से स्मरण किया जाता है क्योंकि ये दिन लाभ और समृद्धि वशिष्ठनीय माना जाता है।
इस दिन के शुभ योगों तथा मुहूर्तों का ध्यान रखकर नए व्यापार-संपर्क आरंभ करना, खाते-किताब खोलना और निवेश करना शुभ माना जाता है। परंपरागत रूप से व्यापारियों द्वारा पहले पन्ने पर “शुभ” और “लाभ” लिखने की रीति प्रचलित है।
उपरोक्त सभी विधान भारतीय संस्कृति में सिर्फ पूजा-प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं — यह दिन सामाजिक संबंधों को मधुर बनाने, दान-पुण्य करने और पूर्ववर्ती वर्ष की बाधाओं को हटाकर नए आरंभ का संदेश भी देता है।